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उनको चैन नहीं आता -हिंदी शायरी

जब तक लगे न कहीं आग
उनको चैन नहीं आता
बुझाने के ठेकेदारों को
ज्यादा देर इंतजार नहीं करना होता
आदमी अपने घर को आग लगाकर
उनकी शरण में आता
भीड़ लग गयी है
लोगों के जज्बतों से खेलने वाले सौदागरों की
खुद ही खिलौना बनकर
आदमी उनके पास पहुंच जाता
लुटकर इस कदर बेहाल होता कि
पछता किस बात पर रहे हैं
यह भी उसे याद नहीं आता
फिर वह किसे सिखाये
जब अपना रास्ता ही भूल जाये

इसलिये अनवरत चलता जाता
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यह आलेख इस ब्लाग ‘दीपक भारतदीप की सिंधु केसरी-पत्रिका ’ पर मूल रूप से लिखा गया है। इसके अन्य कहीं भी प्रकाशन की अनुमति नहीं है।
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आदमी ख़ुद ही खिलौना बन जाता -हिंदी व्यंग्य शायरी

जब तक लगे न कहीं आग
उनको चैन नहीं आता
बुझाने के ठेकेदारों को
ज्यादा देर इंतजार नहीं करना होता
आदमी अपने घर को आग लगाकर
उनकी शरण में आता
भीड़ लग गयी है
लोगों के जज्बतों से खेलने वाले सौदागरों की
खुद ही खिलौना बनकर
आदमी उनके पास पहुंच जाता
लुटकर इस कदर बेहाल होता कि
पछता किस बात पर रहे हैं
यह भी उसे याद नहीं आता
फिर वह किसे सिखाये
जब अपना रास्ता ही भूल जाये
आग बुझाने के ठेकेदारों का काम
इसलिये अनवरत चलता जाता

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