हिन्दी शायरी-सीख और काम (hindi shayari-seekh aur kaam)


उस्तादों ने
वफादारी का रास्ता दिखाया
पर कैसे की जाती है
यह नहीं सिखाया।
इसलिये ज़माने भर के शगिर्द
करते हैं यकीन निभाने की बात
मगर वफादारों में 
कभी किसी ने नाम नहीं लिखाया।
————-
कवि, लेखक एंव संपादक-दीपक ‘भारतदीप”,ग्वालियर 
poet,writer and editor-Deepak ‘BharatDeep’,Gwalior

http://dpkraj.blogspot.com
यह कविता/आलेख रचना इस ब्लाग ‘हिन्द केसरी पत्रिका’ प्रकाशित है। इसके अन्य कहीं प्रकाशन की अनुमति लेना आवश्यक है।
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3.दीपक भारतदीप का  चिंतन
4.दीपक भारतदीप की शब्दयोग पत्रिका
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८.हिन्दी सरिता पत्रिका

2 thoughts on “हिन्दी शायरी-सीख और काम (hindi shayari-seekh aur kaam)

  1. Reza Reza Sapnon Wale
    Toote Chehre Aadhe Log,

    Jane Wale Kab Aate Hain
    Kyun Karte Hain Wade Log.

    Aas Main Bethi Shehzadi Ki
    Maang Main Chandi Jhaank Chuki,

    Itni Dair Se Kyun Aate Hain Aakhir Ye Shehzade Log ?

    Pyar Ki Raah Pe Ungli Thaame,
    Andha Dhund Chal Parte Hain,

    Na Samjhi Mein Marr Jaate Hain
    Hum Se Seedhe Saadhe Log….

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