प्रेम को ढूँढे पर मिलता नहीं-हिंदी शायरी


उगते सूरज को करें सभी नमन
डूबते से कभी नजर न मिलाएं
कामयाबी के शिखर पर पहुँचा आदमी
अपने चारों और फैले
पद, पैसा और प्रतिष्ठा की रोशनी को
अपनी ही ऊर्जा से
चमकने वाली समझ बैठता
जब गिरता है तो उसे सब तरफ
अंधेरा नजर आता है
जिस पर करता था भरोसा
वही दुश्मन नजर आता है
फिर भी उस समय देता है
जमाने को दोष
सच से मूँह छिपाता है
जिन्हें सच का ज्ञान है वह ढूंढते हैं
दिल का ही चैन और अमन
शिखर के ऊपर हों या
जमीन पर हों उनके पाँव
किसी भी क्षण में न पछताएँ
—————————–
प्रेम को ढूँढे पर मिलता नहीं
घृणा और विवाद फैलाता
खुद आदमी सब जगह
प्रेम की भाषा कभी समझता नहीं
दोष देता है जमाने को
अपने अहंकार को छोड़ता नहीं
———————–

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2 thoughts on “प्रेम को ढूँढे पर मिलता नहीं-हिंदी शायरी

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