यह कौनसी अक्लमंदी है-हास्य कविता

चंद पलों की खुशी की खातिर
पूरी जिन्दगी दाव पर लगा देना
भला कौनसी अक्लमंदी है
सब कुछ करते हैं हम
अपने नाम के लिए
लेते हैं इसका और उसका नाम
हम करतार नहीं है
सब जानते हैं
फिर भी हर पर अपना काम
लिखा हो यही मानते हैं
आजाद लगती हैं अक्ल
पर वह तो रूढियों और रीति रिवाजों को
निभाने के लिए समाज की बंदी [...]

मनु स्मृति: दंड का उचित उपयोग न करने वाला अपयश का भागी

१. जो व्यक्ति ऐसे लोगों को दंड देता है जिन्हें दंड नहीं देना चाहिए तथा जिनको देना चाहिऐ उनको नहीं देता उसे जगत में बहुत अपयश मिलता है और मरने के बाद वह नरक भोगता है.
२.सबसे पहले अपराध करने को समझाना चाहिऐ, जब उसका प्रभाव न पड़े तब उसकी भर्त्सना करनी चाहिए. जब इससे [...]

अंतर्जाल पर सम्मान-हिन्दी हास्य कविता

बहुत शोर सुनते थे
कोई तरकश चलता
ब्लोग जगत में सजा रहा है
किसी सम्मान की दुकान
देखा तो निकले दस तीर
निकले उसमें थे दस वीर
दावा यह किया कि बस
यही लिखते हैं अंतर्जाल पर अच्छा
बाकी पेश करते हैं कच्चा
बस इनका ब्लोग ही हमें
ब्लोग की तरह हमेशा फबता
कहैं दीपक बापू
चल पडी हैं हिन्दी ब्लोग में
एक और [...]

भोर में ही शुरू शोर -हिन्दी कविता साहित्य

अभी हुई है भोर
शुरू कर दिया उन्होने शोर
कैसे न होंगे दिन भर बोर
जहाँ मौन रखकर ध्यान करना था
वहाँ लगा रहे हैं दिमाग पर जोर
कुछ सीखना था प्रात:
परमात्मा का नाम लेकर
डाल दिया मुहँ में रोटी का कोर
आदमी सुख तो चाहता है
पर दिल में उसके अहसास के लिए
कोई कोना बाकी नहीं है
चारों तरफ भरा है [...]

हम छोड़ आये अंतर्जाल की वह गलियाँ-हास्य आलेख

जब मैंने शुरू में अंतर्जाल पर लिखना शुरू किया तब पता नहीं था की ब्लोग क्या होता है पर इस पर हमारे लिखे को दूसरे भी पढ़ सकते हैं यह सोचकर मैंने इसे अपनी पत्रिका की तरह उपयोग करने का निश्चय किया. इसकी वजह यह थी कि हम जिन अंतर्जाल पत्रिकाओं को अपनी रचनाएं [...]