रौशनी और अँधेरे का व्यापार-हास्य कविता

वादों के बादल बरसने का
मौसम जब आता है
यादों पर ग्रहण लग जाता है
जजबातों के सौदागर तय करते हैं कि
कौनसा सा वादा बरसाया जाये
किस याद को लोगों के दिमाग
से भुलाया जाये
तमाम के लगाते नारे रचकर
हवाई किला किया जाता है खडा
जो कभी खुद नहीं चलते
उसके दरवाजे कितने भी हों आकर्षक
रास्ता एक [...]

हम छोड़ आये अंतर्जाल की वह गलियाँ-हास्य आलेख

जब मैंने शुरू में अंतर्जाल पर लिखना शुरू किया तब पता नहीं था की ब्लोग क्या होता है पर इस पर हमारे लिखे को दूसरे भी पढ़ सकते हैं यह सोचकर मैंने इसे अपनी पत्रिका की तरह उपयोग करने का निश्चय किया. इसकी वजह यह थी कि हम जिन अंतर्जाल पत्रिकाओं को अपनी रचनाएं [...]

नकली खोये की मिठाई, हो गयी प्यार से जुदाई-हास्य व्यंग्य

वह सड़क पर रोज खडा होकर उस लड़की से प्रेम का इजहार करता था और कहता”-आई लव यू।
”कभी कहता-”मेरे प्रपोजल का उत्तर क्यों नहीं देती।’
वह चली जाती और वह देखता रह जाता था। आखिर एक दिन उसने कहा कहा-”मुझे ना कर दो, कम से कम अपना वक्त खराब तो नहीं करूं।”
वह लडकी आगे बढ़ [...]