Posted on January 30, 2008 by दीपक भारतदीप
१. जो व्यक्ति ऐसे लोगों को दंड देता है जिन्हें दंड नहीं देना चाहिए तथा जिनको देना चाहिऐ उनको नहीं देता उसे जगत में बहुत अपयश मिलता है और मरने के बाद वह नरक भोगता है.
२.सबसे पहले अपराध करने को समझाना चाहिऐ, जब उसका प्रभाव न पड़े तब उसकी भर्त्सना करनी चाहिए. जब इससे [...]
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Posted on January 28, 2008 by दीपक भारतदीप
बहुत शोर सुनते थे
कोई तरकश चलता
ब्लोग जगत में सजा रहा है
किसी सम्मान की दुकान
देखा तो निकले दस तीर
निकले उसमें थे दस वीर
दावा यह किया कि बस
यही लिखते हैं अंतर्जाल पर अच्छा
बाकी पेश करते हैं कच्चा
बस इनका ब्लोग ही हमें
ब्लोग की तरह हमेशा फबता
कहैं दीपक बापू
चल पडी हैं हिन्दी ब्लोग में
एक और [...]
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Posted on January 27, 2008 by दीपक भारतदीप
वादों के बादल बरसने का
मौसम जब आता है
यादों पर ग्रहण लग जाता है
जजबातों के सौदागर तय करते हैं कि
कौनसा सा वादा बरसाया जाये
किस याद को लोगों के दिमाग
से भुलाया जाये
तमाम के लगाते नारे रचकर
हवाई किला किया जाता है खडा
जो कभी खुद नहीं चलते
उसके दरवाजे कितने भी हों आकर्षक
रास्ता एक [...]
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