Posted on January 27, 2008 by दीपक भारतदीप
जब मैंने शुरू में अंतर्जाल पर लिखना शुरू किया तब पता नहीं था की ब्लोग क्या होता है पर इस पर हमारे लिखे को दूसरे भी पढ़ सकते हैं यह सोचकर मैंने इसे अपनी पत्रिका की तरह उपयोग करने का निश्चय किया. इसकी वजह यह थी कि हम जिन अंतर्जाल पत्रिकाओं को अपनी रचनाएं [...]
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Posted on January 26, 2008 by दीपक भारतदीप
वह सड़क पर रोज खडा होकर उस लड़की से प्रेम का इजहार करता था और कहता”-आई लव यू।
”कभी कहता-”मेरे प्रपोजल का उत्तर क्यों नहीं देती।’
वह चली जाती और वह देखता रह जाता था। आखिर एक दिन उसने कहा कहा-”मुझे ना कर दो, कम से कम अपना वक्त खराब तो नहीं करूं।”
वह लडकी आगे बढ़ [...]
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Posted on June 16, 2007 by दीपक भारतदीप
शिष्य के हाथ से हुई पिटाई
गुरुजी को मलाल हो गया
जिसको पढ़ाया था दिल से
वह यमराज का दलाल हो गया
गुरुजी को मरते देख
हैरान क्यों हैं लोग
गुरू दक्षिणा के रुप में
लात-घूसों की बरसात होते देख
परेशान क्यों है लोग
यह होना था
आगे भी होगा
चाहत थी फल की बोया बबूल
अब वह पेड युवा हो गया
राम को पूजा दिल से
मंदिर बहुत [...]
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Posted on June 15, 2007 by दीपक भारतदीप
दोस्ती निभाने के वादे
किये नही जाते
निभाए जाते हैं।
जुबान से कहने के
मौक़े आते हैं हर दिन
निभाने के कभी कभी आते हैं।
देखा रोज यह कहने वालों की
भीड़ लगी रहती है कि कोइ
मुसीबत में हमें याद कर लेना
घिरता हूँ जब चारों और से
वही दोस्त सबसे पहले छोड़ जाते हैं
जो हर पल निभाने की कसमें
सबसे ज्यादा खाते हैं
——————
कोई भी [...]
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Posted on June 14, 2007 by दीपक भारतदीप
वैज्ञानिकों ने आसमान एक धरती का अस्तित्त्व खोज निकाला है, उनके दावों पर अगर गम्भीरता से विचार करें तो अविश्वास का कोई कारण मुझे तो नज़र नहीं आता । अमेरिकी वैज्ञानिकों की खोज पर कभी किसी ने उंगली नहीं उठायी और शायद वही हैं जो आज भी अपने देश का सिर पूरे विश्व में उठाएँ [...]
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