इस पत्रिका के पहले औपचारिक अंक का विमोचन

आज से यह पत्रिका प्रत्येक शनिवार को नियमित रूप से प्रकाशित होगी। इसका लेखन एवं संपादन एक स्वयंसेवी प्रयास है। आज सभी जगह पत्र पत्रिकाओं के नाम पर अपने साथ पाठक जोड़कर अपनी शक्ति दिखाते हुए उसका उपयोग अपने धन संग्रह तथा सम्मान अर्जित करने के लिये प्रयास किये जा रहे हैं। इसी कारण लोग उन पत्रिकाओं से संतुष्ट न होने की शिकायत कर रहे हैं। पहले यह प्रयास प्रकाशन जगत में हो रहा था अब यह अंतर्जाल पर भी शुरू हो गया है। चूंकि इसका संपादक और लेखक एक आम आदमी और सामान्य लेखक है इसलिये इस पत्रिका को ऐसे पाठकों के लिये प्रारंभ किया जा रहा है जो एकांत में अपना अध्ययन और ंिचंतन करते हैं।

भारत में पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन कोई आर्थिक दृष्टि से लाभदायक नहीं है पर फिर भी अनेक लोग इस कार्य को इसलिये करते हैं क्योंकि इसकी आड़ में उनको अन्य प्रकार से आर्थिक और सामाजिक उपलब्धियां प्राप्त होतीं हैं। इसके अलावा अधिकतर पत्र पत्रिकाओं में राजनीति, फिल्म और क्रिकेट के विषयों को ही महत्व दिया जाता है। हम अपनी इस पत्रिका में इन विषयों से परे रहेंगे और अति आवश्यक होने पर ही इनकी भी चर्चा करेंगेे। अपना पूरा ध्यान सार्थक विषयों के अध्ययन, चिंतन और मनन पर केंद्रित करेंगे। उच्च कोटि के साहित्य का सृजन भले ही न कर पायें पर सार्थक लेखन का सृजन करते हुए हुए ही इस पत्रिका आगे बढ़ायेंगे।

इस संबंध में निवेदन है कि सुधि पाठक अपनी टिप्पणियां अपने पूरे पते के साथ रखें और अपने प्रश्न का उत्तर मिलने की पुष्टि करें। मैंने अपने अंतर्जाल पर अनुभव से यह सीखा है कि यहां मित्र और विरोधी नाम बदल बदलकर अपनी टिप्पणियां देते हैं तब यह भ्रम हो जाता है कि अधिक पाठक हैं। इसलिये मेरे द्वारा संदेश भेजे जाने के बाद पाठक उसका उत्तर दें तभी यह मान सकता हूं कि लोग इसे पढ़ रहे हैं। अर्थात मेरे साथ पाठकों को भी इस पत्रिका के विकास और स्वरूप के लिये तकलीफ उठानी होगी। हां, बेहतर बेहतर और पठनीय सामग्री का जिम्मा मैं स्वयं लेता हूं। इस पत्रिका को चलाने का दायित्व मेरा अकेले का नहीं है और पाठकों को अपनी टिप्पणियां रखकर मुझे प्रोत्साहित करना पड़ेगा तभी इसमे नित्य औन नया स्वरूप आ पायेगा। मेरे पास अधिक आर्थिक शक्ति नहीं है और न ही मेरे पास प्रबंध कौशल है और जो लोग चाहते हैं कि अंतर्जाल पर सार्थक पत्रिका निरंतर छपती रहे तो वह अपना सहयोग दें। इसमें मैं अपने अन्य ब्लाग/पत्रिकाओं की वह हिट रचनायें भी रखूंगा जिन पर अनेक लोगों ने अपनी टिप्पणियां रखीं है। यह पत्रिका प्रत्येक शनिवार को दोपहर के समय प्रकाशित होगी। जिन लोगों को नियमित पढ़ना है वह इस पत्रिका साइडबार में दिख रहे मेरे ब्लाग@पत्रिकाएं पढ़ सकते हैं। प्रयास वह यही करें कि वह इसी पत्रिका से जाकर पढ़ें ताकि मुझे यह आभास होता रहे कि लोग इस पत्रिका को पढ़ रहे हैं। इसके साथ ही हम इस पत्रिका के पहले अंक को विमोचन करते हैं। जय श्री कृष्ण

दीपक ‘भारतदीप’, ग्वालियर
लेखक संपादक

One Comment

  1. Raji Chandrasekhar
    Posted June 28, 2008 at 7:22 pm | Permalink

    स्वागत है ।
    मैं हिन्दी का हिन्दीतर ब्लॊगर हूँ ।
    केरल के तिरुवनन्तपुरम में रहता हूँ,बीवी-बच्चों के साथ ।


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