१. जो व्यक्ति ऐसे लोगों को दंड देता है जिन्हें दंड नहीं देना चाहिए तथा जिनको देना चाहिऐ उनको नहीं देता उसे जगत में बहुत अपयश मिलता है और मरने के बाद वह नरक भोगता है.
२.सबसे पहले अपराध करने को समझाना चाहिऐ, जब उसका प्रभाव न पड़े तब उसकी भर्त्सना करनी चाहिए. जब इससे भी वह न समझे तो उस पर अर्थ दंड लगाना चाहिए, जब इसका भी अनुकूल प्रभाव नहीं पड़े तो उसे शारीरिक दंड देना चाहिऐ. उसके बाद भी प्रभाव न पड़े तो चारों डंडों का प्रयोग करना चाहिए.
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