भोर में ही शुरू शोर -हिन्दी कविता साहित्य

अभी हुई है भोर
शुरू कर दिया उन्होने शोर
कैसे न होंगे दिन भर बोर

जहाँ मौन रखकर ध्यान करना था
वहाँ लगा रहे हैं दिमाग पर जोर
कुछ सीखना था प्रात:
परमात्मा का नाम लेकर
डाल दिया मुहँ में रोटी का कोर
आदमी सुख तो चाहता है
पर दिल में उसके अहसास के लिए
कोई कोना बाकी नहीं है
चारों तरफ भरा है शोर
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