अंतर्जाल पर सम्मान-हिन्दी हास्य कविता

बहुत शोर सुनते थे
कोई तरकश चलता
ब्लोग जगत में सजा रहा है
किसी सम्मान की दुकान
देखा तो निकले दस तीर
निकले उसमें थे दस वीर
दावा यह किया कि बस
यही लिखते हैं अंतर्जाल पर अच्छा
बाकी पेश करते हैं कच्चा
बस इनका ब्लोग ही हमें
ब्लोग की तरह हमेशा फबता

कहैं दीपक बापू
चल पडी हैं हिन्दी ब्लोग में
एक और दुकान
अंतर्जाल पर आयी है हिन्दी तो
साथ लाई है साहित्य से वैसे लोग भी
जो हर साल बाटेंगे और
बटोरेंगे कई इनाम
लिखने से अधिक पायेंगे सम्मान
अपने ही तर्कों का करेंगे अपमान
जो वेब साईट नहीं उठा पा रही
अपने पाठको को बोझ
उन्हें ही ब्लोग जगत पर सजाएंगे
इनाम पाने के लिए ब्लोगर कहलायेंगे
आज यह सम्मानित करेंगे तो
तो कल उनसे सम्मानित हो जायेंगे
हम तो ठहरे छोटे शहर के ब्लोगर
भला कहाँ बडे शहर वालों से जीते पायेंगे
पर देख-देख कर अपना मन बहलायेंगे
हास्य का रस यहाँ बिखेरते जायेंगे
उन्मुक्त हास्य भाव दिखाएँगे
उनके एक तरकश में है
केवल तीर दस
हमारे बारह तरकश में
कई हैं शब्दों के तीर
हमने पसंद उनकी चलते देखना
सम्मान पाना तो उनको ही फबता
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